हम वकीलों को जीएसटी के दायरे से बाहर करवाने की लड़ाई लड़ते रहेंगे- अजय माकन

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री अजय माकन ने कहा कि हमने आज से वकीलों को जीएसटी से बाहर करवाने की लड़ाई की शुरुआत कर दी है और यदि मोदी सरकार ने वकीलों को जीएसटी के दायरे से जल्द बाहर नही निकाला तो हम इस लड़ाई को पूरे देश में लेकर जाऐंगे। श्री माकन ने कहा कि हम वकीलों को जीएसटी के दायरे से बाहर करवाने की लड़ाई लड़ते रहेंगे। दिल्ली के वकीलों ने आज प्रदेश अध्यक्ष श्री अजय माकन के नेतृत्व में मोदी की केन्द्र सरकार द्वारा वकीलों को जीएसटी के दायरे में लाने के खिलाफ तथा दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा वकीलों के चैम्बरों और कार्यालयों पर बिजली के कमर्शियल बिल वसूलने के खिलाफ राजघाट पर सत्याग्रह किया। राजघाट पर सत्याग्रह में प्रदेश अध्यक्ष श्री अजय माकन के अलावा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दिल्ली प्रभारी श्री पी.सी. चाको, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव श्री के.सी. मित्तल, श्री ओम प्रकाश बिधूड़ी, साकेत जिला कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री राजपाल कसाना, दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्री राजीव खोसला व उपाध्यक्ष श्री जतन सिंह, दिल्ली बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्री आर.एन. वत्स, शाहदरा जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्री महेश शर्मा व ओ.पी. तरार, श्री बी.पी. त्यागी, एडवोकेट विरेन्द्र कसाना, दिनेश कुमार, एडवोकेट सुनील कुमार, धीरेन्द्र त्यागी,सुरेन्द्र चौहान, श्री प्रद्यूमन सिंह, श्री तरुण त्यागी, श्री संजय गहलोत, श्री अशोक बसौया, सरफराज अहमद सिद्दकी, सीमा जोशी,  गौरव दुआ, निखिल भल्ला, भारत भूषण, प्रवीण भाटी, अनुराग कसाना, नईम जहान हीना, विनिता सिंह, क्षितिज शर्मा, अमित धनकड़, जोनी शर्मा, नरेन्द्र कुमार शर्मा, एस.एस. हुड्डा मुख्य रुप से मौजूद थे। राजघाट पर वकीलों के साथ सत्याग्रह पर बैठने के बाद दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री अजय माकन ने संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि जब दूसरे अन्य प्रोफेशनलस् जैसे कि डाक्टरों को जीएसटी के दायरे से बाहर किया गया है तो मोदी सरकार ने वकीलों के साथ भेदभाव करके उनको जीएसटी के दायरे में क्यों लाया गया है जबकि वकील भी वकालत के द्वारा समाज सेवा का काम करता है। श्री माकन ने कहा कि हमने दिल्ली मास्टर प्लान बनाते समय वकीलों को अपने घरों की बेसमेन्ट व घरों से ऑफिस चलाने की अनुमति दी थी तो वकीलों से कमर्शियल बिजली की दरे क्यों वसूली जा रही है। इसी प्रकार वकीलां के ऑफिसों से सम्पति कर वसूला जा रहा है जो कि भेदभावपूर्ण व अन्याय है। श्री माकन ने कहा कि कांग्रेस की दिल्ली सरकार ने 2002 में तीस हजारी कोर्ट के चैम्बरों में बिजली के कवउमेजपब बवददमबजपवद दिए थे, परंतु उन पर अब दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा कमर्शियल दरों से बिजली के बिल वसूले जा रहे हैं।

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